आधुनिक विज्ञान

मनुष्य का निर्माण। यह श्लोक गर्भ में मानव विकास के प्रारंभिक चरणों को (अत्यंत सटीक तरीके से) चित्रित करता है।
[अल-अलक़, 96:1]
اِقۡرَاۡ بِاسۡمِ रब्बी الَّذِیۡ خَلَقَ ۚ﴿۱﴾
(ऐ प्यारे!) अल्लाह के नाम से पढ़ो, जिसने (सब कुछ) पैदा किया है।
(ऐ हबीब!) अपने रब के नाम से (आगाज़ करते हुए)पढ़िए जिसने (हर चीज़ को) पैदा किया।
[अल-अलक़, 96:2]
خَلَقَ الۡاِنۡسَانَ مِنۡ عَلَقٍ ۚ﴿۲﴾
उसने मनुष्य को जोंक की तरह (माँ के गर्भ से चिपके हुए) लटकते हुए पिंड से बनाया।
उसने इंसान को (रह्मे माँदर में) जोंक की तरह मुअल्लाह वुजूद से पैदा किया।
[अल-अलक़, 96:1]
اِقۡرَاۡ بِاسۡمِ रब्बी الَّذِیۡ خَلَقَ ۚ﴿۱﴾
(ऐ प्यारे!) अल्लाह के नाम से पढ़ो, जिसने (सब कुछ) पैदा किया है।
(ऐ हबीब!) अपने रब के नाम से (आगाज़ करते हुए)पढ़िए जिसने (हर चीज़ को) पैदा किया।
[अल-अलक़, 96:2]
خَلَقَ الۡاِنۡسَانَ مِنۡ عَلَقٍ ۚ﴿۲﴾
उसने मनुष्य को जोंक की तरह (माँ के गर्भ से चिपके हुए) लटकते हुए पिंड से बनाया।
उसने इंसान को (रह्मे माँदर में) जोंक की तरह मुअल्लाह वुजूद से पैदा किया।
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