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अल-बक़रा, 2:45

, by Yasin Popatia, 1 min reading time

*सब्र और नमाज़ के ज़रूर (अल्लाह से) मदद चाहो*
[अल-बक़रा, 2:45]
وَ اسۡتَعِیۡنُوۡا بِالصَّبۡرِ وَ الصَّلٰوۃِ ؕ وَ اِنَّہَا لَکَبِیۡرَۃٌ اِلَّا عَلَی الۡخٰشِعِیۡنَ ﴿ۙ۴۵﴾
और धैर्य और नमाज़ के द्वारा (अल्लाह से) सहायता चाहो। इसमें कोई संदेह नहीं कि यह काम कठिन है, परन्तु नम्र लोगों के लिए।
और सब्र और नमाज़ के ज़रूरी (अल्लाह से) मदद चाहो, और बेशक ये गिरां है मगर (उन) अजीज़ों पर (हरगिज़) नहीं (जिनके दिल मुहब्बते इलाही से ख़स्ता और ख़शियाते इलाही से शिकस्ता हैं)।
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